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3 जनवरी 2020

2:25 pm

New Pari Ki Kahaniya In Hindi

Pari Ki Kahaniya -  Pari ki kahani in hindi 



हेलो दोस्तों आज मैं जो आपको एक कहानी सुनाने जा रहा हु. यह एक Jadui Pari ki kahani है. आइए दोस्तों देखते हैं Pari Ki Kahaniya


Pari Ki Kahaniya
Pari Ki Kahaniya




एक गांव में धनी राम नाम का सेठ रहता था. वह बहुत ही धनवान व्यक्ति था. उसकी दो-दो पत्नियां थी. पहली पत्नी का नाम था रमा और दूसरी पत्नी का नाम था मीना. छोटी पत्नी मीना दिखने में बहुत ही खूबसूरत थी. उसके काले घने बाल थे. उसकी सुंदर नीली आंखें थे. पर बड़ी पत्नी रमा ज्यादा आकर्षक नहीं थी. इसलिए सेट मीना को ज्यादा प्रेम करता था. रामा दिल की साफ और शालीन औरत थी. घर के सारे काम करती थी. लेकिन मिना पूरे दिन भर शीशे के आगे बैठी रहती और सजती ही रहती थी।

एक दिन धनीराम ने अपनी छोटी पत्नी मीना को आवाज देते हुए कहा- मीना ओह मिना जरा यह आना. परन्तु मिना अपने बाल सवाल रही थी. तो उसने सेठ की आवाज सुनकर भी जवाब नहीं दिया। जब मीना नहीं गई तो रामा सेठ के पास गई तो सेठ ने उसे देखते ही कहा - मैंने मीना को बुलाया है तुम क्यों आई हो यहां। मिना अपने बाल सवाल रही थी तो मैं आ गयी. कोई काम है तो बताओ। तभी मीना भी वहां आ गई और आते ही रमा पर चिल्लाने लगी. मुझे आने में देर हो गई तुमने तो मेरी शिकायत करना ही शुरू कर दिया। रमा बोली - नहीं नहीं मैं तुम्हारी शिकायत नहीं कर रही थी. हां हां मुझे पता है. उन दोनों में झगड़ा बढ़ता देख धनीराम ने रमा से कहा अरे रमा तुम रहने दो. क्या छोटी-छोटी बात पर झगड़ा शुरु कर देती हो. जाओ मेरे लिए गिलास पानी लेकर आओ.



Jadui Pari Ki Kahani


App Pad Rhe Hai jadui pari ki kahani  जब रमा पानी लेने के लिए गई तो धनीराम ने मीना से कहा- सुनो मैं व्यापार के लिए दूसरे शहर जा रहा हूं एक महीने बाद लौटूंगा। पर तुम यह बात रमा को मत बताना क्योंकि मैं चलते समय उसका मनहूस चेहरा भी नहीं देखना चाहता हूं. हां ठीक है. पर आप मेने लिए नयी साड़ी और गहने लेकर आना. रमा ने दोनों की बातें सुन ली थी. और सेठ की ऐसी बातें सुनकर उसे बहुत बुरा लगा. पर फिर भी उसने भगवान से कहा - हे भगवान मुझे कुछ नहीं चाहिए बस मेरे पति की रक्षा करना। सेट के जाने के बाद रमा के प्रति मीना का व्यवहार और ज्यादा बिगड़ गया था और हर छोटी छोटी बात पर वे रमा पर चिल्लाने लगती।


एक बार दोनों में कहासुनी हो गई तो मीना ने रामा से कहा तुम कुरूप हो तुम्हें कोई प्यार नहीं करता। तुम किसी भी काम के लायक नहीं हो. मीना की ऐसी बातें सुनकर रमा बहुत ज्यादा दुखी हो गई. और घर छोड़ कर जंगल में चली गई. जंगल में जाने पर उसने एक पेड़ देखा। जिसके नीचे कचरा पड़ा था. तो रामा ने कहा - इस पेड़ के नीचे कितनी गंदगी है मैं यहां सफाई कर देती हूं. और जैसे ही सफाई की तो वह पेड़ बोलने लगा-  तुम एक नेक दिन इंसान हो तुम्हारे सरे दुख साफ़ हो जाएंगे। रमा ने इस पेड़ को शुक्रिया कहा. और आगे चली गई. आगे चलने पर उसने एक केले का पेड़ देखा जो खेलों के भार की वजह से एक तरफ झुक गया था. यह पेड़ तो जुक गया है  इसे सहारे की जरूरत है. उसके बाद रमा ने झुके पेड़ को सहारा दिया। तो वह पेड़ भी बोलने लगा. जैसे तुमने मुझे भार की वजह से गिरने से बचाया है वैसे ही तुम भी हमेशा दुखो के भार से बची रहोगी। उसने केले के पेड़ को भी शुक्रिया कहां। और आगे चलने पर उसे एक पेड़ देखा जो लगभग सूख चुका था.


रमा ने कहा - इस पेड़ को तो पानी की जरूरत है नहीं तो यह सूख कर मर जाएगा। और रमा पास के तालाब से पानी लाकर उस पेड़ को डालती रही. तो सूखा पेड़ अचानक से हरा भरा हो जाता है. और बोलने लगता है. जिस प्रकार तुमने मुझे वापस खूबसूरत बनाया है. वैसे ही तुम हमेशा खूबसूरत रहो. जाओ पास के तालाब में डुबकी लगाकर आओ. रमा पेड़ के कहने पर तालाब में डुबकी लगाई। देखते ही देखते किसी परी के समान खूबसूरत हो गई. और उसका चेहरा भी चमकने लगा. रमा बोली अरे वाह मैं तो बिल्कुल ही बदल गई. और फिर जल्दी से वह वापस अपने घर गई. तो मीना उसे देखकर बिल्कुल चौकी गई. तुम तो बिल्कुल ही बदल गई हो. आखिर तुम इतनी खूबसूरत कैसे हो गई. तो रमा ने उसे सारा वाकया सुनाया तो मीणा ने कहा-  मैं भी वहां जाऊंगी और तुमसे भी ज्यादा खूबसूरत जादुई चेहरा लेकर आऊंगी।


उसके बाद मीना रमा के बताए रास्ते पर जाती है. तो उसे भी वहीं पेड़ दिखते हैं. पर उनकी तरफ ध्यान नहीं देती। तो एक पेड़ ने खुद मिना से कहा - मेरे आस पास बहुत कचड़ा पड़ा है तुम थोड़ा साफ कर दो. पर मीना ने कहा - मैं यहां कोई सफाई करने नहीं आई हु. तुम बस मुझे उस तालाब का पता बता दो जो जादुई चेहरा देता है. और इस तरह मीना सभी पेड़ों को उनके काम के लिए मना कर दी गई. और तालाब का पता पूछती गई. और फिर अंत में तालाब तक पहुंच जाती है. तो वह झट से उसमे डुबकी लगाती है. तो खूबसूरत होने के बजाय कुरूप हो जाती है. यह देख मीना चिल्लाने लगी. तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया। तो पेड़ो ने जवाब दिया। यह तालाब वैसा ही चेहरा देता है जैसा तुम्हारा मन है. तुम एक बुरे और घमंडी मंन की इंसान हो. तुमने हमेशा अपने रूप पर घमंड किया है. और रमा के साथ बुरा बर्ताव किया है. इसलिए तुम्हें यह मिला क्योंकि तुम इसी की हकदार हो.


इनके बाद मीना अपने किए पर बहुत दुखी हुई. परंतु रामा सेठ के पास रहती और मीना अपने किए पर रोती रहती।


देखा किसी के साथ बुरा व्यवहार करने का फल कितना बुरा होता है. अगर मिना भी बुरा बर्ताव नहीं करती तो  उसे भी खूबसूरत वाला जादुई चेहरा मिलता और खुशी से रहती।



Pari Ki Kahani In Hindi


हेलो दोस्तों आज मैं जो आपको कहानी सुनाने जा रहा हु यह Rani Pari Ki Kahani है. आइए दोस्तों देखते हैं Rani Pari Ki Kahani


सीतापुर में बड़े से समंदर किनारे एक जंगल था. वहां सब नाग और नागिन रहते थे. उसी जंगल में सलोनी नाम की नागिन रहती थी. जो बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और दिल की बहुत अच्छी थी. नागिन सलोनी की सिर्फ दो सहेलियां थी. नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका। ये दोनों सलोनी को बिल्कुल पसंद नहीं करते। उससे बहुत ही ज्यादा ईशा करते थे. दोनों नागिन सलोनी के सामने अच्छे रहते। लेकिन पीट पीछे बहुत ही ज्यादा बुराई करते थे.


यह बात नागिन सलोनी को पता थी. लेकिन फिर भी वह अपनी सहेलियों से कुछ नहीं कहती थी. मेरी कोई ऐसी सहेली हो जो मुझसे सच्ची दोस्ती करें। और मुझ पर भरोसा करें। एक दिन समंदर में बहुत बड़ा तूफान आया.


अगले दिन सुबह नागिन सलोनी और उसकी सहेलियां तीनों मिलकर समंदर के पास गई. और देखा कि एक जलपरी समंदर से बाहर आकर बेहोश पड़ी हुई है. यह तो एक जलपरी है शायद कल रात के तूफान में समंदर से बाहर आ गई है. चलो इसकी मदद करें।


नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका बोली - हमें तो बहुत काम है. हम जा रहे हैं. तुम ही इसकी मदद कर दो. अपनी सहेलियों की यह बात सुनकर नागिन सलोनी बहुत उदास हो जाती है. और खुद ही अपने नागिन रूप में आकर जलपरी की मदद करती है. अपने हाथों से जलपरी को उठाकर समंदर में डालती है. जैसे ही नागिन सलोनी ने जलपरी को समंदर में डाला वह ठीक हो गई. और ठीक होकर ऊपर आई. नागिन सलोनी का जलपरी ने धन्यवाद किया। दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त बन गए. नागिन सलोनी हर रोज जलपरी से मिलने के लिए समंदर के पास आती. दोनों जलपरी और नागिन सलोनी मिलकर खूब सारी बातें करते। देखते ही देखते दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए.



Rani Pari ki kahani


App Pad Rhe Hai - Rani Pari ki kahani  एक दिन नागिन सलोनी और जलपरी बैठकर बातें कर रहे थे. नागिन सलोनी बोली - मुझे एक बार समंदर की गहराई में जाकर देखना है. वहा कैसे रहते हैं. जलपरी बोली - हां मुझे भी पृथ्वी पर घूमना बहुत पसंद है. नागिन सलोनी ने अपनी शक्तियों से जलपरी को पूरा इंसानों जैसा बना दिया। सारे जंगल की सैर करवाई और अपने दोस्तों से भी नागिन सलोनी ने जलपरी को मिलवाया।



यह देखकर नागिन सलोनी के दोस्त उससे और भी ज्यादा बुराई करने लगे. नागिन सलोनी को समंदर की गहराइयों में ले गई. सारे समंदर की सैर करवाई। और अपनी मां से भी मिलवाया। समंदर की सैर करके नागिन सलोनी बहुत ही ज्यादा खुश हो गई. समंदर तो बहुत ही ज्यादा खूबसूरत है. नागिन सलोनी और जलपरी की बढ़ती हुई दोस्ती को देखकर नागिन रूद्राली और ऋषिका बहुत ही ज्यादा इरसा करने लगे.


नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका बोली - दोनों की दोस्ती तो बहुत गहरी होती जा रही है. अरे हां कुछ ना कुछ तो करना पड़ेगा। अगले दिन जलपरी समंदर किनारे नागिन सलोनी का इंतजार कर रही थी. तभी वहां नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका पहुंच गए. जलपरी ने कहा -  तुम्हारे साथ नागिन सलोनी क्यों नहीं आई? कहां है वह?


नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका बोली - तुम्हें पता है नागिन सलूनी तुम्हें बिल्कुल पसंद नहीं करती। वो तुम्हारे पीट पीछे तुम्हारी बहुत बुराइयां करती है. कल तो उसने कहा था कि वह आज के बाद तुम्हारे पास कभी नहीं आएगी। जलपरी बोली - नहीं-नहीं सलोनी तो मेरी बहुत अच्छी दोस्त है. वह मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं कहेगी। वह तो मुझे बहुत पसंद करती है.


नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका बोली - ऐसा नहीं कह सकती का क्या मतलब। हम तुमसे झूठ बोल रहे हैं. देख लेना आज के बाद वह यहां कभी नहीं आएगी। जलपरी बोली - मुझे नागिन सलोनी पर बहुत विश्वास है. मैं यहां से जा रही हूं.


नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका दोनों नागिन सलोनी के पास गई. और कहा सलोनी तुम्हें पता है?  हम अभी अभी जलपरी से मिलकर आ रहे हैं. वह तो तुम्हारे बारे में बहुत बुरा भला कह रही थी. और हम से कह रही थी कि वह तुम्हें बिल्कुल पसंद नहीं करती। हां वह तो कह रही थी कि वह तुम्हारी शक्ल भी नहीं देखना चाहती। तुम उसके पास मत जाना।


नागिन सलोनी बोली - तुम दोनों मेरी दोस्त हो और जलपरी भी मेरी बहुत अच्छी दोस्त है. मैं तुम्हें भी जानती हूं. और जलपरी को भी बहुत अच्छे से जानती हूं. वह मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं कहेगी। मुझे उस पर पूरा विश्वास है. और रही बात शक्ल ना देख़ने कि वह मेरी दोस्त है. अगर वह मेरे से नाराज है. तो मैं उसे मना लूंगी। तुम दोनों चिंता मत करना।


नागिन सलोनी जाने लगी तुम कहां जा रही हो देख लेना वह नहीं आएगी कहा ना तुम दोनों चिंता मत करो. नागिन सलोनी समंदर के किनारे जाकर इधर-उधर जलपरी को ढूंढने लगी. तभी जलपरी समंदर के ऊपर आई. दोनों एक दूसरे को देख कर बहुत ही ज्यादा खुश हो गए. एक-दूसरे का हाथ पकड़ा और कहा-  मैं जानती थी. तुम मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं कहोगी। मुझे तुम पर पूरा विश्वास था. इसीलिए मैं ऊपर आई तुम्हें देखने के लिए. मुझे भी तुम पर पूरा विश्वास था. इसलिए मैं तुम्हारा इंतजार कर रही थी.


वह दोनों तो बहुत बुरी है मैं उनको नहीं छोडूंगी। सबक सिखाना पड़ेगा। वह दोनों तो अभी नादान है. आगे चलकर कुछ समझ जाएंगे सच्ची दोस्ती क्या होती है. दोनों नागिन रूद्राली और ऋषिका नागिन सलोनी और जलपरी की बातें सुन रही थी. नागिन सलोनी की अच्छाई को देखकर दोनों बहुत ही ज्यादा शर्मिंदा हो गई. दोनों ने नागिन सलोनी और जलपरी से माफी मांगी। जलपरी और नागिन सलोनी ने दोनों दोस्तों को माफ कर दिया। फिर सब दोस्त मिलकर राजी खुशी रहने लगे.


तो आपने देखा दोस्तों नागिन और जलपरी की दोस्ती। अगर दोस्ती में विश्वास हो तो उसे कोई नहीं तोड़ सकता। अगर आपको  यह कहानी अच्छी लगी हो तो जरूर शेयर करें.

26 दिसंबर 2019

6:04 pm

sher aur chuha ki kahani शेर और चूहा की कहानी

sher aur chuha ki kahaniya शेर और चूहा की कहानी:



sher aur chuha ki kahani
sher aur chuha ki kahani

एक हरे भरे चारागाह मैं एक शेरों का झुंड रहता था. शेरो का राजा मजे से धूप से सीख रहा था. और अपने बच्चों के साथ खेल रहा था. उसकी रानी उसके साथ बैठी हुई थी. और अपने बच्चे को राजा के साथ खेलते हुए देख खुश हो रही थी. पास में रहता था चूहों का राजा अपनी प्रजा के साथ. चूहा का राजा एक पत्थर पर बैठा हुआ था. और शेर की बच्चों की शरारतओं का मजा ले रहा था. एक शरारती चूहा बिल में से निकल कर बाहर आया. वह शेर के साथ खेलना चाहता था. चूहे के राजा को जब शरारती चूहे के इरादों का पता चला. तो बोला - शरारती चूहे वहां जाकर शेरों की राजा को तंग मत करो. क्यों नहीं महाराज शेरों की राजा मेरे साथ क्या करेंगे?  

Sher Aur Chuha ki kahaniya:


वे तुम पर इतने नाराज होंगे. और तुम्हें खा जाएंगे. वह हंसने लगा. यह तो आप मुझे डराने की कोशिश कर रहे हो. वह शरारती चूहा शेरों की राजा की तरफ भागने लगा. चूहों का राजा बिल्कुल हैरान रह गया. शरारती चूहे के इस हरकत को देखकर. शरारती चूहा शेरों की राजा की दाढ़ी खींची उससे अपने लिए एक नर्म बिस्तर बनाया और इस पर लेट गया. 


शरारती चूहे की इस हरकत को देखकर शेरों की राजा को बड़ा गुस्सा आ गया. शेरों की राजा ने अपना गुस्सा दहाड़ कर दिखाया. और अपने नाख़ून से शरारती चूहे को दूर फेंक दिया. शेरों के राजा शरारती चूहे की तरफ चल कर आए. और जोर से दहाड़े। शरारती चूहा तो डर से  थरथर कांपने रहा था. ये सब देखकर चूहों का राजा भागा। और आकर शेरों के राजा के सामने खड़ा होकर बोला - बचे को माफ़ कर दीजिए वो राजाओ के राजा।

चूहों का राजा बोला - हे  शेरो के राजा इस छोटे से बच्चे को इसकी गलती के लिए माफ कर दो.

शेरों का राजा बोला -  इस बच्चे ने मुझे गुस्सा दिलाया है इसलिए इसे इसकी सजा मिलेगी। मैं इसे खा जाऊंगा। चूहों का राजा बोला - राजाओं के राजा इसकी जगह मैं खुद को पेश करता हूं. शेर हंसने लगा और बोला - मैं तो तुम दोनों को खा जाऊंगा। चूहों का राजा अचानक रुका और अपनी तलवार निकालकर बोला - तो मेरे पास कोई चारा नहीं है सिवाय इसके कि आप से लड़कर अपनी प्रजा की रक्षा करू. शेरों के राजा को बड़ी हैरानी हुई चूहों के राजा का यह जवाब सुनकर। उसने अपने पंजे चूहों के राजा की तरह बढ़ाया। चूहों का राजा डर से काँप रहा था. पर फिर भी अपनी रक्षा के लिए लड़ता रहा. शेरों की राजा ने कहा - मैं बहुत खुश हूं तुम्हारी हिम्मत को देख कर तुम्हारे इस तरह अपनी प्रजा के लिए डटे रहने से मैं खुश होकर तुम दोनों को माफ करता हूं. 

चूहों का राजा यह सुनकर बहुत खुश हुआ. और बोला - आपका बहुत-बहुत शुक्रिया महाराज आपकी जय हो मैं इस एहसान का बदला एक दिन जरूर चुकाऊंगा।

Sher Aur Chuha ki kahaniya:



कुछ दिनों बाद की बात है. शेरों का राजा अपनी रानी के साथ चारागाह में घूम रहे थे. शिकारी ने वहां जाल बिछाया हुआ था. शेरों के राजा को पकड़ने के लिए. अनजाने में शेरों के राजा उस पिंजरे में फंस गए. चूहों का राजा अपनी शाम की सैर के लिए जा रहा था. और उसने देखा कि राजा एक पिंजरे में कैद है. चूहों के राजा ने अपनी पूरी फौज बुलाई और राजा ने पिंजरे की तरफ इशारा करते हुए कहा.  हम सबको मिलकर शेरों के राजा को आजाद कराना है. सब लोग आ जाओ. 

सारे चूहों ने अपने दांतो से कुतरना चालू कर दिया। और जल्द ही पिंजरा टूट गया. शेरों की रानी खुशी से उछल पड़ी शेर बोला - चूहों के राजा मेरी जान बचाने के लिए आपका और आपकी और आपकी प्रजा का बहुत-बहुत शुक्रिया। चूहा के राजा बोला - हे राजाओं के राजा यह तो मेरा फर्ज था. मुझे बहुत खुशी है कि मैं आपके उस एहसान का बदला चुका सका जब आपने हमें माफ किया था. 

उस कुछ दिन के बाद से वह सबसे अच्छे दोस्त बन गए. और खुशी-खुशी रहने लगे.


आपने पढ़ी शेर और चूहा की कहानी हमें बताये की अपने क्या सीखा इस कहानी से.

25 दिसंबर 2019

8:12 pm

Princess ki kahani हिंदी कहानी

{BEST} Princess Ki Kahani : हिंदी कहानी इच्छाधारी नागिनओं का पति Hindi Kahani

Princess ki kahani
Princess ki kahani



आप पड़ रहे है Princess ki kahani हिंदी मै:


एक समय की बात है. अंबिकापुर नगरी नरेश माहिम राठौर ने अपने राज्य में एक प्रतियोगिता का आयोजन किया. इस प्रतियोगिता में एलान किया गया कि देश-विदेश में उगने वाले तरह-तरह के स्वाद, आकार और शक्तियों से भरपूर फलों को राजा के सामने पेश करना। एलान के मुताबिक जो फल सबसे ज्यादा विचित्र और अद्भुत शक्तियों वाला होगा उस फल को लाने वाले को अंबिकापुर नरेश एक संगमरमर का बना हुआ महल इनाम में देंगे। राजा का ऐलान अंबिकापुर से कुछ दूर फूलपुर गांव में रहने वाले दो लकड़हारे ने भी सुना। इन दोनों का नाम था. रामू और कालू। 

यह दोनों एक दूसरे के बड़े ही पक्के दोस्त थे. और हमेशा एक दूसरे के साथ ही रहने की कोशिश किया करते थे. 


रामू पढ़ाई और निखट्टू था. दूसरा कालू कुछ बुद्धिमान था. और खुद को हमेशा रामू से बहुत अच्छा समझा करता था. राजा का ऐलान सुनने के बाद इन दोनों ने सोचा। क्यों ना राजा का इनाम पाने के लिए मिलकर कोशिश की जाए? उन्हें याद आया. गांव में रहने वाले जादूगर ने एकबार बातचीत के दौरान उन्हें बताया था. कि गांव के पास रहने वाले जंगल में कई प्रकार के विचित्र फल फूल लगते हैं. जिनके बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता. जादूगर ने यह भी कहा था. कि जंगल के काफी अंदर जाने पर एक बरगद के पेड़ पर रहने वाली माता हर्षिका की पूजा करने के लिए परी लोक की परीया आती है. और पूजा करके प्रसाद के रूप में माता को परीलोक के जादुई फल चढाती है. और परीलोक चली जाती है.



रामू और कालू ने सोचा। कि वह गांव में आगे जाकर परीलोक के उन फलों को अगर प्राप्त कर लें तो फिर वैसे फल तो पूरे संसार में और कहीं नहीं मिल सकते। और इसलिए वह यह इनाम जरूर जीत लेंगे। 


मन में ऐसा विचार आते ही उन दोनों ने जंगल में जाकर फल ढूंढने का निर्णय कर लिया। कालू ने रामू से कहा - मित्र जादूगर के अनुसार यदि हम जंगल में गहरे जाकर बरगद के पेड़ की छानबीन करें, तो हमें वहां पर परी लोक से लाए गए फल मिल सकते हैं. परीलोक के जादुई फल होने के कारण यह फल कभी खराब ही नहीं होते। और उन्हें तरह-तरह की शक्तियां होती हैं. तथा यह राजा के ऐलान के अनुसार ही विचित्र रंगों और आकारों के भी होते हैं. क्यों ना हम अपनी किस्मत आजमाए और फलो को ढूंढने के लिए जंगल में चले. कालू की बात सुनकर रामू ने कहा - कालू सही कह रहे हो मैं भी बहुत दिनों से यही सोच रहा हूं कि क्यों ना हम अपनी किस्मत आजमाएं। शायद यह हमारे ही गांव के जंगल में अपने फल इसलिए रख कर जाती हैं कि राजा का ऐसा ऐलान होने वाला हो. और हमारी किस्मत से वह संगमरमर का बड़ा महल जीतना पहले से ही लिखा हो.


आप पड़ रहे है Princess ki kahani हिंदी मै:


दोनों दोस्त इस तरह की बात करके जंगल की तरफ निकल पड़े। वे अभी पहुंचे हैं थे कि जंगल में तरह-तरह के जानवरों से उनका सामना शुरू हो गया. सबसे पहले उनके ऊपर एक जंगली सूअर ने हमला कर दिया। किंतु दोनों दोस्तों ने बड़ी ही बहादुरी से उस जंगली सूअर से अपने प्राणों की रक्षा की. किंतु जंगली सूअर से पीछा छुड़ाने के चक्कर में वह जंगल में बहुत आगे पहुंच गए. और भागते - भागते उन्हें यह ख्याल भी नहीं रहा कि पूरी तरह से शाम हो गई थी. 



आगे का रास्ता दिखाई ना देने के कारण वे वहीं रुक गए. किंतु जानवरों के डर से उन्होंने सोचा कि वह किसी बड़े पेड़ पर सो जाएंगे। उन्हें अँधेरे में एक बड़ा पेड़ दिखाई पड़ा। और दोनों दोस्त उस पेड़ पर चढ़कर उसकी चौड़ी डाली पर अपनी पगड़ी से खुद को बांधकर सो गए. कुछ ही देर बाद दोनों को तरह-तरह की आवाजें सुनाई देने लगी. और रोशनी दिखाई देने लगी. तभी उन्होंने देखा कि आसमान से परिया नीचे उतर रही हैं. और जिस पेड़ पर भी सोए हुए थे. उसी पेड़ की सबसे ऊंची डाली पर बनी एक गोसले में कुछ फलों को रखकर, और कुछ पूजा पाठ करके मैं वहां से चली गई. दोनों दोस्तों को समझ में आ गया कि मैं उसी बरगद के पेड़ पर आसरा लिए बैठे हैं जिसे वे ढूंढ रहे थे.




आप पड़ रहे है Princess ki kahani हिंदी मै

वे बड़े खुश हुए. और परियों के जाते ही वे पेड़ की सबसे ऊंची डाली पर चढ़े। उन्होंने देखा घोसले में सतरंगी रंग के कुछ फल रखे हुए हैं. जिनमें से अद्भुत रोशनी निकल रही है. और जिनका आकार हर पल बदलता जा रहा है. उन फलों को देखकर उन्हें पूरा विश्वास हो गया कि राजा द्वारा शुरू की गई प्रतियोगिता को वही जीतने वाले हैं. लेकिन वे जैसी ही फल को उठाने की कोसिस करते तुरंत ही वह पर एक नागिन प्रकट हो गई. और उसने दो पलों में ही एक फल को निगल लिया। यह देखते ही रामू ने तुरंत बाकी बचे आखरी फल को अपने मुंह में डाल लिया। रामू के ऐसा करते ही नागिन वहां से गायब हो गयी. लेकिन फल रामू के मुंह में जा चुका था. कालू बड़ा दुखी हो गया. और उसने सोचा रामु ने तो यह अद्भुत फल खा लिया है. अब राजा को क्यों दिखाएंगे? 

रामु बोलै कालू तुम उदास ना हो मैंने उसको खाया नहीं सिर्फ निकला है. तुम मुझे तालाब की तरफ ले चलो और उल्टा लटकाकर मेरे गले पर वार करो. मेरा फल जरूर मेरे गले से बाहर आकर तालाब में गिर जाएगा।

और फिर हम उसे निकाल लेंगे। रामु की बात सुनकर कालू को चैन आया. और उसने तुरंत ही रामू को पास में ही बने एक तालाब में अपने कंधे की मदद से उल्टा लटका दिया। और उसको जोर - जोर से मारने लगा. ऐसा करने से सचमुच ही उसके मुंह से निकल कर तालाब में गिर गया. किन्तु उसी समय एक सफेद रंग की नागिन प्रकट हुई. और उसने फल अपने मुंह में डाल लिया। और वहां से गायब हो गई. इस तरह से दिए गए दो जादुई फल दोनों खतरनाक नागिन और द्वारा लिए गए. 


और यह दोनों उदास होकर वापस अपने गांव आ गए. इन दोनों के जाने के बाद दोनों सांप जिसमें से एक सफेद और दूसरे का रंग हरा था. अपने असली रूप इच्छाधारी नागिन में बदल गए. और उन्होंने अपने आप को सुंदर लड़कियों के रूप में बदल लिया। और दोनों को रामु बड़ा ही पसंद आया. और उन्होंने सोचा कि कालु बड़ा ही दुष्ट व्यक्ति है. और उसने रामू को मारा है और रामू की वजह से वह दोनों फल उनको को मिला है. वे दोनों ही रामू से प्यार करने लगी. और वे रामु  और कालू का पीछा करते-करते उनके गांव पहुंच गई. और रामू के घर के पास ही घर बनाकर रहने लगी. वे दोनों लड़कियों के रूप में रामू का बड़ा ध्यान रखती। रामू के घर में अब किसी बात की कमी नहीं थी. रामू के घर में आने वाली कोई भी मुसीबत को दोनों नागिनी आने से पहले ही खत्म कर देती थी.



आप पड़ रहे है Princess ki kahani हिंदी मै:

धीरे-धीरे रामू को भी इस बात का एहसास होने लगा. और एक दिन उसने उन सांपों के घर जाकर उन्हें बाहर बुलाया। और कहा तुम दोनों कौन हो और लड़कियां होने के बावजूद भी अकेले यहां कैसे रहती हो? तुम्हारे मां बाप कहां है? उन दोनों इच्छाधारी सांपों ने लड़कियों के रूप में रामू से कहा रामु हम पास के जंगल में रहने वाले गरीब लड़कियां हैं. हमारे माता-पिता को सांप ने खा लिया। इसलिए हम लोग यहां घर बनाकर रहती हैं. और तुम्हें कड़ी मेहनत करते देख हमें तुम पर दया आई. इसलिए हम तुम्हारा ध्यान रखते हैं. हम तुमसे एक बात कहना चाहते हैं. बात यह है कि हम अकेले इधर आते हैं. और तुम भी अकेले ही हो. क्या ऐसा नहीं हो सकता कि तुम्हारा विवाह हमारे साथ हो जाए? रामू ने कहा - बात तो ठीक है ऐसा हो सकता है. पर तुम में से कौन से कोण मुझसे विवाह करना चाहता है?



यह सुनकर दोनों इच्छाधारी नागिन बोली - रामु हम दोनों ही तुमसे प्यार करना करते हैं. और दोनों ही तुमसे विवाह करना चाहते है. उनकी बात सुनकर रामु हैरान हो गया. और सोचने लगा भला में तो एक हु और मुझसे ये दोनों कैसे विवाह कर सकते है? किन्तु उन दोनों के विवश करने पर रामु ने उन दोनों से ही निकाह कर लिया। इसके बाद रामू के जीवन में किसी प्रकार की कोई भी कमी नहीं रही. वह जब जो चाहता वैसा ही हो जाता। कड़ी धूप में बारिश हो जाती, तो कभी पतझड़ के मौसम में फूल खिल जाते, खाली घड़ा अपने आप भर जाता और मुंह से शब्द निकलते ही रामू की इच्छाएं पूरी हो जाती। पर रामु ने कभी इन बातों पर ध्यान नहीं दिया। कि ऐसा जादू किस तरह से होता है. वह अपनी पत्नियों के साथ जीवन का आनंद उठाने लगा. इस विवाह के समय रामू का दोस्त कालू पड़ोस के गांव में अपनी बहन की शादी में गया हुआ था. 



जब वह लौटकर आया. तो उसने देखा कि रामू दोनों पत्नियों के साथ अपना जीवन खुशी से बता रहा है. यह देखकर कालू को रामू से बड़ी ही जलन और हैरानी हुई. और यह जानने के लिए कि अचानक जिस निखट्टू और गरीब रामू से कोई भी लड़की विवाह करने को तैयार नहीं थी. अचानक दो लड़कियों ने कैसे विवाह कर लिया? वह जादूगर विचित्र सेन के पास गया. जादूगर ने अपने जादुई शीशे में देखा और बताया रामू का विवाह लड़कियों से नहीं बल्कि दो इच्छाधारी नागिनओं से हुआ है. और यह नागिनी वहां उसी जंगल में उसी समय से रह रही थी जब वह विचित्र फल लेने गए थे तुम लोग. तथा रामू को इस बात का पता भी नहीं है कि उसकी पत्नियां इच्छाधारी नागिन है. कालू ने तुरंत रामू को जदुगर द्वारा बताई गई यह बात की उसकी दोनों पत्नियां इच्छाधारी नागिन है तुरंत बता दी. किंतु उसकी बात पर रामू को भरोसा नहीं हुआ. लेकिन फिर वह सोचने लगा कि कुछ ना कुछ तो बात जरूर है. और मुझे यह जरूर पता लगाना चाहिए। कि आखिर यह दोनों लड़कियां कौन है?


एक बार जादूगर विचित्र सिंह ने बातों ही बातों में कहा था. कि इच्छाधारी नगीने 24 घंटे में एक बार अपने असली रूप में जरूर आती है. इसलिए रामू ने यह सोचा कि अगर यह दोनों इच्छाधारी नगीने हैं. पूरे दिन में एक बार अपने असली रूप में जरूर आएंगे। उसने अपनी दोनों पत्नियों से कहा कि वह खेती के लिए बीज लेने शहर से बाहर जा रहा है. और 2 दिन बाद आएगा। और फिर अपने घर के अंदर ही पत्नियों पर नजर रखने के लिए छुप गया. इच्छाधारी नागिन को जैसे ही पता चला कि उनका पति रामू विदेश गया है. और 2 दिन तक वह घर में नहीं आएगा। वे तुरंत अपने असली रूप में आ गई. रामू सब कुछ देख रहा था. अपनी दोनों पत्नियों को इंसान से नागिन बनता देखकर रामू जिस जगह छुपा था. वही जोर से सीखा और डर के कारण बेहोश हो गया. रामू के चिल्लाने से दोनों नागिन पूरी तरह से घबरा गयी. और वापस इंसान वेश में आ गई. 


आप पड़ रहे है Princess ki kahani हिंदी मै
रामु को होश में लेन के लिए वे उसके मुंह पर पानी छिड़कने लगी. होस में आने पर रामू ने अपनी पत्नियों से कहा - कि वे उसे उनकी असलियत बताएं। रामु की पत्निया बोली - रामू यह सच है कि हम दोनों ही इच्छाधारी नागिन है. किंतु हम तुमसे विवाह करने के बाद अब तुम्हारी पत्नियों बन चुकी हैं. हमसे तुम्हें कभी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। ना ही कभी किसी को पता चलेगा कि हम नागिन हैं. हम तुम से प्रेम करते हैं. और तुम्हारे साथ जीना चाहते हैं. लेकिन हम तुम्हें किसी बात का दबाव नहीं देंगे। अब यह तुम्हारे ऊपर है कि तुम हमें अपने साथ रखना चाहते हो या अपने से दूर भेजना चाहते हो. 

पत्नियों की बात सुनने के बाद रामू को पूरा विश्वास हो गया. कि उसकी पत्नियां कभी उसको नुकसान नहीं पहुंचा सकती हैं. और उनकी इच्छाधारी नागिन होने के बाद भी उसको उनसे किसी प्रकार का भय नहीं है. तो वह अपनी पतियों के साथ आराम से रहने लगा. जब कालू को पता चला कि नगीनो की सच्चाई जाने के बाद भी रामू को कोई परेशानी नहीं है. बल्कि वे और भी खुशी के साथ अपनी पत्नियों के साथ रहता है. तो उसने यह बात पूरे गांव में फैला दी. और गांव वाले रामू की पत्नियों को मारने के लिए योजना बनाने लगे. 

एक दिन उन्होंने रामू की झोपड़ी के चारों तरफ आग लगा दी. रामू गहरी नींद में सो रहा था. पर गांव वालों ने यह भी नहीं सोचा कि झोपड़ी में आग लगाने से रामू भी अपनी पत्नियों के साथ मर जाएगा। लेकिन रामू की दोनों पत्नियों को तुरंत यह पता चल गया कि गांव वालों ने उन्हें और उनके पति को मारने के लिए झोपड़ी में आग लगा दी है. इसलिए तुरंत खुद को बाज के रूप में बदल लिया। और दोनों ने ही वहां से भागकर खुद को बचाने के बदले रामू का हाथ पकड़ा और उड़ते हुए झोपड़ी से बाहर आ गई. गांव वाले यह देखकर पूरी तरह से डर गए. और वहां से भाग गए. लेकिन रामू अपनी पत्नियों को धन्यवाद देने लगा.

इस दिन के बाद से सारे गांव में लोग रामू से डरने लगे और रामू खुशी का जीवन व्यतीत करने लगा.


आपने अभी Princess ki kahani हिंदी मै पढ़ी हमें बातये की अपने क्या सीखा इस कहानी से 
7:10 pm

Pariyon Ki Kahani परियों की कहानी

Pariyon Ki Kahani : पांच सरो वाले सांप का अंत New Hindi Kahani 2020



परियों की कहानी
परियों की कहानी



आप पड़ रहे है  Pariyon Ki Kahani हिंदी मै:

एक समय की बात है एक राजा था. एक बार उस राजा के मन में पूरे संसार को देखने की इच्छा हुई उसने अपने सारे लोगों को इकट्ठा किया और अपने पानी के जहाज पर घूमने चल दिया. 
वे लोग जब तक चलती रहे तब तक उनको चारों तरफ पेड़ों से घिरा हुआ हरा भरा एक टापू मिल गया उस टापू पर हर पेड़ के नीचे एक नाग बैठा हुआ था जैसे ही राजा ने अपने लोगों को इस टापू पर उतरने को कहा सभी नाग फन फैलाकर खड़े हो गए और राजा के लोगों पर आक्रमण करने के लिए तैयार हो गए. 

नागो और राजा के लोगों के बीच में बहुत सारी लड़ाई हुई और किसी तरह राजा के सैनिकों ने उन जंगली नागों को अपने नियंत्रण में कर लिया लेकिन इस लड़ाई में ज्यादा से ज्यादा राजा के सैनिक मारे गए थे आखिरकार जो लोग बच रहे थे वे उस टापू में बने जंगल की दूसरी तरफ से जहां पर बहुत ही खूबसूरत बगीचा लगा हुआ था. 


जिसमें संसार के सभी खूबसूरत पेड़ पौधे लगे हुए थे और वहां जो सबसे आश्चर्यजनक बात थी वह थी उस बगीचे में रखे हुए तीन बक्से जिसमें से एक में चांदी थी दूसरे में सोना और तीसरे में मोती राजा के सेनिको ने जैसे ही यह देखा उन्होंने अपने अपने थैले खोलकर इन सभी कीमती चीजों को उस में भरना शुरू कर दिया कुछ आगे चलने पर उन्होंने इस बगीचे के बीच में एक बहुत बड़ी झील को देखा और जब वे झील के किनारे पहुंचे तो अचानक बड़े ही हैरान हो गए क्योंकि झील उनसे बातें कर रही थी झील ने कहा - तुम लोग कौन हो तुम्हें यहां कौन लाया है क्या तुम हमारी राजा को देखने के लिए आए हो.

लेकिन झील को बाते करते देख राजा और राजा के लोग बड़े ही डर गए थे. इसलिए उन्होंने कोई भी जवाब नहीं दिया यह देखकर वे झील फिर से बोली - तुम्हे डरना की चाहिए क्योंकि यह तुम्हारा दुर्भाग्य है जो तुम्हें यहां ले आया है हमारी राजा एक खतरनाक सांप है और उनके पांच सिर है अभी वह सो रहे हैं लेकिन कुछ ही समय के बाद वे जाग जाएंगे और यहां मेरे अंदर नहाने आएंगे अगर उन्होंने तुम्हें यहां देखा तो वह तुम्हें खा जाएंगे तुम्हे उनसे कोई नहीं बचा सकता लेकिन अगर तुम उनसे बचना चाहते हो तो केवल एक ही रास्ता है तुम अपने कपड़े उतार कर राजा के महल से लेकर झील तक के रास्ते में बिछा दो, जब उनके पैरों में मुलायम मुलायम लगेगा तो उन्हें बहुत अच्छा लगेगा और मैं बहुत खुश हो जाएंगे और उन्हें तुम पर क्रोध नहीं आएगा मैं तुम्हें कोई छोटी मोटी सजा देंगे और तुम्हें वापस जाने देंगे। 


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झील की बात सुनकर राजा और राजा के सिपाहियों ने ऐसा ही किया और उस 5 सिर वाले सांप के आने का इंतजार करने लगे.

थोड़ी ही देर में धरती कांपने लगी और कई जगह से धरती फट गई जहां जहां से धरती फटी थी वहां से शेर चीते और जंगली जानवर बाहर निकल निकल कर राजा के महल के चारों तरफ खड़े होने लगे और देखते ही देखते उस 5 सिर वाले सांप राजा के चारों तरफ करोड़ों की संख्या में जंगली जानवर इकट्ठा हो गई.


जब वह 5 सरो वाला भयंकर सांप कपड़ों के ऊपर से रेंगता हुआ आगे बढ़ रहा था तो उसे महसूस हुआ कि रास्ते में कुछ मुलायम चीज पड़ी है जो हमसे बोला - वह कौन है जिसने यह किया है यह क्या चीज है.

राजा और राजा के लोगों का तो डर के मारे बुरा हाल हो गया लेकिन झील ने कहा - महाराज आपकी सेवा में यह उन लोगों ने किया है जो आपको देखने आए हैं साँप ने जोर से फुक्कार मारते हुए कहा - उन्हें मेरे सामने लाया जाए.

राजा अपने सिपाहियों के साथ सांप के सामने आया और उसने थोड़े से सब्दो में अपनी साडी कहानी राजा को बतादी। उसकी कहानी सुनने के बादबड़ी ही खूंखार और खतरनाक आवाज में साँप बोला - तुमने यहाँ आने की हिम्मत करी है तुमको इसकी सजा मिलेगी हर साल अब तुमको तुम्हे अपने राज्य से 5 जवान लड़के और 5 जवान लड़कियां यहां लानी पड़ेगी मेरी सेवा करने। अगर तुमने ऐसा नहीं करा तो मैं इस संसार को बर्बाद कर दूंगा।

उसके बाद सांप ने अपनी जंगली जानवर को राजा और राजा के सैनिकों को रास्ता दिखाने के लिए कहा और उन्हें यहां से चले जाने के लिए कहा.

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वे जल्दी ही अपने देश वापस लौट गए 1 साल पूरा हो गया राजा 5 लड़के और लड़कियों का इंतजार करने लगा दूसरी तरफ राजा ने 5 लड़के और 5 लड़कियों को देश के लिए जान देने के लिए आमंत्रित किया और देखते ही देखते हजारों लड़के लड़कियां इस काम के लिए आगे आ गए. 

राजा ने एक नया पानी का जहाज बनवाया और 10 लड़के और लड़कियों को उस जहाज पर बैठाकर देश से बाहर कर दिया। जल्दी ही पानी का जहाज टापू पर पहुंच गया और जब 10 लड़के लड़कियां उस टापू पर उतरे किसी शेर ने उन पर हमला नहीं करा और वे लोग आसानी से झील तक पहुंच गए.

इस बार झील ने भी उनसे कोई बात नहीं करी वे चुप चाप  बैठ कर इंतजार करने लगी कुछ ही देर के बाद सपो का राजा आया उसने वहां लड़के और लड़कियों को बैठे हुए देखा और एक ही बार में उनको निकल लिया।

कई सालो तक ऐसा होता रहा दूसरी तरफ राजा का एक बेटा हुआ और उसे जन्म देते देते महारानी की मृत्यु हो गई. वह बच्चा धीरे-धीरे बड़ा होने लगा जब मैं 5 साल का था तो अचानक एक बूढ़ी औरत महल में आई कि वह राजकुमार की देखभाल करना चाहती है राजा ने बूढ़ी औरत को राजकुमार की देखभाल करने की इजाजत दे दी. 

बूढ़ी औरत ने उसे बहुत प्यार से पाल पोस कर बड़ा किया और उसे हर तरह की विद्या सिखाई जब वह 18 साल का हो गया तो उस बूढ़ी औरत ने राजकुमार से कहा - मैं तुम्हारे पास एक बहुत बड़े काम के लिए आई हूं तुम्हें इस संसार को एक बहुत बड़े खतरनाक सांप से मुक्त करना है मैं तुम्हें इसका रास्ता बताऊंगी असलियत में मैं उस सांप के महल में काम करने वाली दासी हूं लेकिन कई सालों से सांप को बिना किसी गुनाह के भोले-भाले लड़के लड़कियों को खाते हुए देख रही हूं उनकी दर्दनाक चीखें सुनकर मुझे बहुत तकलीफ होती है इसलिए मैं चाहती हूं तुम मुझसे सजा दो. 

राजकुमार उस बूढ़ी औरत को अपनी मां के समान प्यार करता था और उसे यह भी पता था कि हर साल उसके राज्य से 10 लड़के और लड़कियों को देश की रक्षा के लिए देश से बाहर जाना होता है जहां पर कोई खतरनाक सांप उन्हें खा जाता है इसलिए उस सांप को मृत्यु दंड देकर अपने प्रजा वासियों को बचाना चाहता था. 
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वह बोला - जल्दी बताओ मैं क्या करूं जिसके कारण से खतरनाक सांप मर सकता है और मैं अपनी प्रजा वासियों की रक्षा कर सकता हूं. 

बुढ़िया बोली - मैं तुम्हें एक गुप्त रास्ता दिखाउंगी तुम उससे अंदर चले जाना वहां से तुम सीधे सांपों के राजा के महल में पहुंच जाओगे तुम्हे दिखाई पड़ेगा कि वह एक ऐसे पलंग पर सोता है जो पूरी तरह से घंटियों से बना है उसे पलंग के ऊपर एक तलवार तंगी ह उस तलवार से ही उसका खात्मा हो सकता है. वह जादुई तलवार है अगर वह टूट भी गई तो फिर से बन जाती है तुम धीरे से उसके ऊपर जाना ताकि घंटों में आवाज ना इसलिए तुम पहले अच्छी तरह से रुई भर देना फिर पलंग पर चढ़ के उस तलवार निकाल लेना और धीरे से उसकी पूछ पर मार देना वह तुरंत जग जाएगा वह जैसे ही जाएगा अपने सारे फ़न फैला देगा लेकिन इससे पहले कि वह तुम्हें देखें तुम उसके सारे सिरोको काट देना।

राजकुमार ने बुढ़िया की बात मानी और बताए गए रास्ते पर चल दिया जल्दी ही वह साँप के महल में पहुंच गया. वहा उसने वही किया जो बुढ़िया ने उसे बताया था सारी घंटियों में रुई भर कर पलंग के ऊपर तंगी तलवार उठाई और सांप के जागते ही एक ही झटके में उसके पांचो सर काट दिए.

सप के मरते ही पूरे महल पर राजकुमार का राज हो गया सभी जंगली जानवर सिर झुका कर राजकुमार के सामने बैठ गए राजकुमार ने मरे हुए सांप के शरीर को झील में डाल दिया और इस टापू को भी अपनी राज्य की सीमा में मिला दिया राजकुमार की बहादुरी से राजा की प्रजा हमेशा के लिए सांप की दहशत से मुक्त हो गई और सब आराम से रहने लगे.


आपने अभी Pariyon Ki Kahani हिंदी मै पड़ी हमें बताये की अपने इस कहानी से क्या सीखा

24 दिसंबर 2019

7:41 pm

Achi Achi kahaniya अच्छी अच्छी कहानिआ हिंदी मै

अच्छी अच्छी कहानिआ हिंदी मै : Achi Achi kahaniya


achi achi kahaniya

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आप पड़ रहे है अच्छी अच्छी कहानिआ हिंदी मै achi achi kahaniya


उत्तराखण्ड के एक गांव के पास में एक बड़ा घना जंगल था. गांव मे जल्दी ही नाग पंचमी का त्यौहार आने वाला था. इसलिए सभी लोग नाग पंचमी की तयारी जोर शोर से  कर रहे थे. इस छोटे से गांव में एक सिवालर मंदिर था. जिसकी विशेष बात यह थी. की एक नागिन रात दिन शिवलिंग से लिपटी रहती थी. और किसी को भी इसके आस पास बुरी नजर से नहीं बटकने देती थी. यहा तक की वह नागिन किसी भी शिव भक्त  के साथ कुछ बुरा नहीं होने देती थी. 

अगर कोई भी किसी शिव भक्त को तकलीफ पहुंचने की कोसिस करता। तो ना जाने इस नागिन को कैसे पता चल जाता। और वो उसे जाके डस लेती। इसलिए इस नागिन को लोग नागिन माँ के नाम से पुकारा करते थे. 

यह नागिन असली में एक इच्छाधारी नागिन थी. जो सेकड़ो वषो से इस शिवलिंग की पूजा कर रही थी. और उसकी पूजा से खुश होकर भगवान ने उसे महीने में हर पूर्णिमा और एकादशी को रूप बदलने का आशीर्वाद दिया था. उनके आशीर्वाद के अनिसार वह हर एकादशी और पूर्णिमा को अपनी इच्छा अनिसार अपने आप को बदल कर अपना जीवन जी सकती थी. लेकिन इसके साथ ही उसे इस बात का भी दयान रकना था. की अगर उसने इन दो दिनों में रूप बदनले के बाद किसी का भी बुरा किया तो वह हमेशा के लिए गद्दी के रूप में परिवर्तित हो जाएगी। और लोग उससे मुफ्त में काम करा कर उससे सम्मान देने के बदले डाँडो से मारा करेंगे।


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एक बार गांव में सुका पर गया. जिसके कारण गरीब किसान चंदू और उसकी पत्नी सुमित्रा की म्रुत हो गयी. इन दोनों का एक 18 वर्ष का बेटा था. जिसका नाम उन्होंने भोपू  रहा था. दुख की बात यह थी की भोपू आयु में 18 वर्ष का था. लेकिन उसकी भुद्धि मात्र 5 वर्ष के बच्चो जैसी थी. माता पिता की मृत्यु हो जाने के बाद वह बड़ा की उदाश होकर भूखा प्यासा बैठा रहता था. यदि उसकी माँ जिन्दा होती तो उसे जबरदस्ती खिलाती पिलाती थी. पर अब माता पिता ना होने के कारण कोई भी नहीं था. जो उसका धयान रखे. इसलिए वह मदिर में बैठा रोता रहता था. लेकिन वह एक बड़ा ही दयालु और नेक दिल युवक था.


वह वहा बैठे - बैठे जब भी किसी गरीब आदमी को मुसीबत में देख्ता। वह बिना किसी दाम के उनकी मुफ्त में मददत करता। इच्छाधारी नागिन यह देखती। और साथ में यह भी देखती। मंदिन में इतने सारे लोग आते है सब बागवान की पूजा करते है. लेकिन उस नेक दिल, दयालु भोपू पर कोई भी दयँ नहीं देता। और सभी उससे पागल समझ कर किनारे से निकल जाते।




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आखिकार एकादशी का दिन आ गया. और नागिन ने अपना रूप बदल लिया और भोपू की माँ के रूप में भोपू के पास आई. और बोली - अरे भोपू तुम मंदिर में बैठ कर क्या कर रहे हो. सुबह से तुमने कुछ खाया की नहीं? में अब भगवान के पास चली गयी हु. और ऊपर से में तुम्हे देकती हु. तुमने मुझसे वादा किया था. की तुम मेहनत करोगे। और भर पेट खाना खा कर कभी शिकायत का मौका नहीं दोगे। लेकिन में देकती हु की तुम हमेशा मंदिर में बैट कर रोते रहते हो. और कोई अगर देता है, तो खाना खाते हो. लेकिन खुद खाना खाने के लिए कुछ भी मेहनत नहीं करते।


माँ को सामने देककर भोपू कुश हुआ. और बोला- माँ तुम क्यों चली गयी हो? तुम्हारे बिना मुझे कुछ भी अच्छा नह लगता। मुझे घर भी अच्छा नहीं लगता। माँ नहाना दोना, खाना पीना कुछ भी अच्छा नहीं लगता।  मुझसे वादा करो की तुम रोज मुझसे मिलने आओगी। तो में तुम्हारी सारी बात मान लूंगा। में मेहनत भी कर लूंगा, पढ़ाई भी कर लूंगा, और खाना भी खा लूंगा। लेकिन उसके लिए तुम्हे रोज मेरे पास आना होगा। तुम्हारे बिना कोई मुझसे प्यार नहीं करता। मुझे पागल कहते है. तुम्ही बताओ माँ क्या में पागल हु?



भोपू की बात सुनकर नागिन बड़ी उदास हो गयी. और उससे भोपू पर बहुत दया आई और वह बोली " बीटा तुम्हे तो पता है की में भगवान के पास आ गयी हु. भगवान मुझे रोज - रोज तुम्हारे पास आने के लिए छुट्टी नहीं देंगे। यहा मुझे भगवान के घर भगवान का काम करना होता है. लेकिन हां में तुमसे वादा करती हु. की में हर एकादशी और पूर्णिमा के दिन तुमसे मिलने जरूर आउंगी। 

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लेकिन इसके लिए एक सर्त है. तुमको एक अच्छा इंसान बनना पड़ेगा। और अपने खेतो में जुताई करके बीज बौने हँगे। फसल उगानी पड़ेगी। उसमे पानी डालना होगा।और फसल तयार होने पर उससे काट चांट कर बाजार में बेचना भी होगा। रोज नहाना होगा और खाना होगा। अगर तुम ऐसा वादा करोगे तो में आ जाऊँगी।


माँ से मिलने की लालच में भोपू ने हर सर्त को मान लिया। और जल्दी ही अपने बैल और हल लेकर खेत मे जुताई करने लगा. लेकिन उससे जुताई करनी नहीं आती थी. और निगीन ने उसके बेल जादूई बेल बना दिए. वह हल लेकर खेत में गया. और बेलो ने कूद ही खेत की जुताई कर दी. फिर नागिन के बेजी जादुई चिड़िया आई. और उसने सारे खेत में बीज के दाने बो दिए.



समय समय पर जादुई हाथी आके अपनी सुठ में पानी बरके पानी डालते। समय से जुताई बुवाई और पानी के कारण भोपू के खेत में उस साल बहुत ही अच्छी फसल हुवी। और नागिन माँ अपने वादे के अनुसार पुरे वर्ष पूर्णिमा और एकादशी को उससे मिलने आती रही.



अच्छी फसल हो जाने के कारण जब उसने फसल को बेचा। नागिन माँ के भेजे जादुई नाग मजदुर बनकर फसल को बाजार तक ले गए. और फिर ठीक तरह से फसल का सोदा करा दिया। भोपू के पास अच्छा पेसा आ गया. तो सादी के लिए रिश्ते भी आने लगे. और गांव के ही किसान के बेटी के साथ ही उसकी सादी हो गयी. पत्नी के आ जाने के बाद उसकी पत्नी भोपू के साथ भोपू की खेती बाड़ी का हिसाब किताब भी करने लगी. सब कुछ ठीक चल रहा था. कुछ दिनों के बाद भोपू के घर में एक बेटा हुवा। अपने बेटे देखकर भोपू का मन अपनी माँ को बुलने के लिए करने लगा.



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पूणिमाशी आते ही भोपू नागिन के पास गया. जहा पर उसकी माँ उसका इंतजार कर रही थी. भोपू को देकते ही उसने उसे गले से लगा लिया। भोपू बोला - माँ तुम्हारी इच्छा के अनुसार सब कुछ करा है, क्या तुम मेरी एक इच्छा पूरी करोगी? नागिन बोली- हां बेटा बोलो तुम क्या चाहते हो? वह बोला माँ क्या तुम अपने पोते को देकने घर नहीं आओगी? 


माँ में चाहता हु की तुम घर आके मेरे बेटे को गोद में लेकर खूब सारा प्यार करो.


भोपू की बात सुनकर नागिन बड़ी ख़ुश हुई. और बोली- अगली एकादशी को जरूर आउंगी ऐसा वादा कर के वह चली गयी. दिन बीतते गए सब कुछ अच्छा ही चल रहा था. एकादशी भी आ गयी. एकादशी के दिन फसल के सौदे के कारण भोपू को पड़ोस के गांव में जाना पड़ा. 


लेकिन अपने वादे की पक्की नागिन भोपू के बेटे से मिलने उसके घर की तरफ चलने लगी. जब नागिन भोपू के घर के पास पहुंची तो उसने देखा की उसका बीटा आंगन में खेल रहा है. लेकिन वह बड़ी परेशान हो गयी क्युकी एक भयानक बिच्छू बच्चे को काटने के लिए तेजी से उसकी तरफ आ रहा था. लेकिन भगवान के दिए वरदान के कारण वह इंसान के रूप में किसी को नुक्सान नहीं पहुंचा सकती थी. 

इसलिए उसने जल्दी ही अपना रूप बदल के नागिन बन गयी. फिर तेजी से उस बिच्छू को अपने मुँह में पकड़ लिए और मार डाला। अभी वह बिच्छू को मर ही रही थी, की भोपू की बीवी वहा आ गयी. और बचे के पास नागिन देककर वह डर गयी. और जोर-जोर से चिल्लाने लगी.

नागिन अपने नागिन वेस में होने के कारण भोपू की बीवी को कुछ नहीं बता सकती थी. और कुछ ही देर गांव वालो ने उसे मार मार कर अदमरा बना दिया। मरने से पहले वह भोपू की माँ के रूप में आ गयी. और भोपू का इन्तजार करने लगी. भोपू का नाम लेके भोपू को बुलाने लगी. सारा गांव हैरानी से देख रहा था की यह क्या हो रहा है. जल्दी ही भोपू वह आ गया. दर्द से करती हुवी नागिन बोली - बेटा भोपू में अपना वादा निभाने के लिए तेरे बेटे को देकने तेरे घर आई थी. 

लेकिन अब मुझे हमेशा के लिए जाना होगा। में तुजे यह बताने के लिए जिन्दा हु की में तेरी माँ नहीं बल्कि सिवलिंक पर रहने वाली नागिन हु. जो माँ के लिए तेरी प्रेम और बक्ति को देककर तेरी माँ का रूप बना कर आती थी. लेकिन बेटा अब में एकादशी और पूर्णिमा को तुजसे मिलने के लिए नहीं आ पाऊँगी। अब  में सचमुच तेरी माँ के पास जा रही हु. मुझसे वादा करो की तुम एक जिम्मेदार इंसान की तरह अपने और अपनी पत्नी की देख्भाल करोगे। तभी में चैन से मर सकुंगी।


भोपू ने रोते हुवे नागिन माँ से वादा किया। की वह जिम्मेदार इंसान की तरह अपनी जिंदगी जियेगा। इसके बाद नागिन हमेसा के लिए इस दुनिया से चली गयी. 


सारा गांव नागिन माँ का त्याग देककर हैरान रह गए. और सब को समज आ गया नागिन भोपू की खुशी के लिए यहा तक आ गयी. और अपनी जादू, ममता, और प्यार से उसने भोपू को एक जिम्मेदार इंसान बना दिया। और फिर आखिरकार इसी ममता के कारण मृत्यु को पर्याप्त हो गयी।


नागिन माँ का यह प्यार हमेशा के लिए अमर हो गया. भोपू और भोपू की पत्नी ने नागिन माँ का बहुत बड़ा मंदिर बनाया। और हर एकादशी को और पूर्णिमा को वह नागिन माँ की याद में अनाथो को मुफ्त में खाना बटवाया जाता था. उस गांव में आज भी नागिन माँ की प्यार का उदाहरद दिया जाता है. जिसने बेटे के प्यार के लिए अपनी जान दे दी.




7:39 pm

Pariyon Ki Kahani परियों की कहानी

Pariyon Ki Kahani : परियों की कहानी Pariyon Ki Kahani


Pariyon Ki Kahani
Pariyon Ki Kahani

App pad rhe Hai Pariyon Ki Kahani hindi mai:

बहुत पुरानी बात है, एक गांव में एक बूढ़ा जादूगर रहा करता था नेट तेल और दयालु था और अपनी तरफ से सबकी मदद करने की कोशिश किया करता था ऐसा कोई भी घर नहीं था जिसकी मदद जादूगरनी ना की हो अब जादूगर की शक्ति बुढ़ापे के कारण काफी कम हो गई थी अपना अधिकांश समय गांव के किनारे बने जंगल में बैठकर बिताया करता था जंगल के किनारे बैठे बैठे जादूगर को कई प्रकार के तरह तरह के ख्याल आते रहते थे और वह अपने पुराने दिनों की यादो मैं खोया रहता था.

एक बार पूर्णिमा की रात को जब वह जंगल में नदी के किनारे बैठकर ख्यालों में खोया हुआ था तभी उसे दूर लगे एक बड़े पीपल के पेड़ के ऊपर बहुत से जुगनू दिखाई दिए जादूगर सोचने लगा अक्सर जुगनू पूरी तरह फैले रहते हैं आखिर ऐसी क्या बात है कि सभी जुगनू ढूंढ के रूप में ऑप्शन झुंड के रूप में एक ही पेड़ पर एक ही जगह उपस्थित है अपने मन की जिज्ञासा को दूर करने के लिए जादूगर पीपल के पेड़ की तरफ चल पड़ा वहां पहुंचते ही उसने देखा कि बहुत से हंस पेड़ों की टहनियों में फंसे हुए हैं और उनके पंख पत्तियों और टहनियों से बुरी तरह से उलझ रहे हैं जिसके कारण वे अपने आपको पेड़ पत्तियों से छुड़ाने में नाकामयाब हो गए हैं और जुगनू अपनी रोशनी से उनकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं.


परियों की कहानी Pariyon Ki Hindi Kahani


जादूगर बड़ा हैरान हुआ अभी मैं सोच ही रहा था कि अचानक एक सुनहरे रंग का हंस बोला है जादूगर तुम रोज यहां आते हो और अपना समय यहां पर जाते हो हम सभी रोज ही तुम्हें देखते हैं हमें पता है कि तुम बहुत ही दयालु जादूगर हो क्या तुम अपने जादू से हमको इस पेड़ की पत्तियों और टहनियों से मुक्त कर सकते हो जादूगर बोला प्यारे हंसों यह सच है कि मैं जादूगर हूं किंतु अब मैं बहुत बुरा हो चुका हूं और मेरी जादुई शक्तियां इतना काम नहीं कर पाती फिर भी क्योंकि आपने मुझसे दद की भीख मांगी है इसलिए मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगा कि आपको इन पत्तियों और टहनियों से छुड़ा पाऊं. और इसके बाद जादूगरनी पेड़ के नीचे बैठकर अपनी तमाम जादुई शक्तियों को मंत्रों के जरिए बुलाना शुरू किया जादूगर के अंदर जीवन शक्ति काफी कम हो चुकी थी.

इसलिए उसकी कड़ी मेहनत के बाद उसकी जादुई शक्तियां फिर से जागृत हुई और जादूगर ने उन शक्तियों की मदद से हंसों को पेड़ की पत्तियों और टहनियों से आजाद करवाने में उनकी मदद की और उन्हें आजाद करा दिया जादूगर की सहायता से सभी हंस पड़े ही खुश हुए और उन्होंने जादूगर से कोई वरदान मांगने को कहा जादूगर जोर से हंसने लगा और ते हुए बोला प्यारे हो तुम भला अपने जीवन की रक्षा खुद ही नहीं कर पाते ऐसी अवस्था में तुम मुझे कैसे कोई वरदान दे सकते हो तुम इतने परेशान ना हो मुझे कुछ भी देने की जरूरत नहीं है.

तुम आराम से अपने घर जाओ और अपना जीवन बिताओ हंस उसकी बात सुनकर तुरंत अपने असली रूप में आ गए परी लोक की महारानी स्वर्णा परी अपनी सभी राशियों के साथ जंगल में घूमने के लिए आई थी और पीपल के पेड़ पर उड़ते हुए जुगनू को देखकर सभी पीपल के पेड़ के ऊपर ही उतर गई थी जिसके कारण उनके पंख बुरी तरह से पीपल के पेड़ में फंस गए थे.

और क्योंकि पीपल का पेड़ ही उन जुगनू का एकमात्र बसेरा था इसलिए जुगनू के घर को उनके घर को बर्बाद नहीं करना चाहती थी इसलिए पीपल के पेड़ पर उन्होंने कोई जादू नहीं करा था और खुद को बचाने के लिए जादूगर से मदद मांगी थी जादूगर यह देखकर बड़ा प्रसन्न हो गया और उसने परियों से कहा प्यारी परियों अगर मुझे कुछ देना ही चाहती हो तो कुछ ऐसा विशेष दो कि मैं गांव की सेवा कर सकूं परियों ने कहा सामने यह जो नदी बह रही है रात को उसका जल जाती हो जाता है.


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यह बात हम परियों के सिवा किसी को भी नहीं पता और इसके जल से हम बड़ी से बड़ी बीमारी को  ठीक कर सकते हैं अगर तुम चाहो तो इस जल का उपयोग करके अपने गांव वालों की सेवा कर सकते हो और यदि इसके अलावा भी कभी तुम्हें हमारी कोई आवश्यकता पड़े तो तुम नदी के जल के पास आकर स्वर्णा परी का नाम बुलाना हम जरूर तुम्हारी पुकार सुनकर तुम्हारे सामने आ जाएंगे और परियों अंतर्ध्यान हो गए जादूगर बड़ा प्रसन्न हुआ और उसने सोचा चलो कम से कम बुढ़ापे में वह यह तो अच्छा काम कर पाएगा ऑप्शन कम-से-कम बुढ़ापे में तो वह कुछ अच्छा काम कर पाएगा और फिर नए उत्साह से अपने गांव वापस चला गया उसने देखा कि गांव के सरपंच के घर सभी लोग जोर जोर से रो रहे थे पूछने पर पता चला कि सरपंच की माता जी ओझा की बीमारी से पीड़ित हो गई है.

और उनके बचने की कोई भी उम्मीद नहीं है जादूगर तुरंत ही नदी की ओर बढ़ चला और वहां से नदी का पानी लेकर आ गया और उसने बिना किसी से कुछ कहे सरपंच की माता जी के ऊपर नदी का एक बाल्टी पानी डाल दिया सभी गांव वालों को जादूगर की इस हरकत पर बड़ा ही क्रोध आया और वह जादूगर को बुरा भला कहने लगे किंतु तभी चमत्कार हुआ और सरपंच की माताजी उठ कर बैठ गई उनको देखने से ऐसा लगता ही नहीं था कि वह पिछले 15 दिनों से बीमार थी उनके शरीर की पूरी शक्ति वापस आ गई थी और वह बहुत ही स्वस्थ लग रही थी यह देखकर जादूगर की जय जयकार करने लगे और उन्हें लगने लगा कि जादूगर की जादुई शक्तियां वापस आ गई है और जादूगर अब सब को ठीक कर सकता है इस घटना के बाद जादूगर अपने घर चला गया.

और सो गया इस घटना को 10 - 15 दिन बीत चुके थे जादूगर अपनी झोपड़ी में आराम कर रहा था कि अचानक उसकी झोपड़ी का दरवाजा खुला और एक खूंखार राक्षस घायल अवस्था में उसके सामने आकर बैठ गया और बोला मुझे पता चला है कि तुम अपनी जादुई शक्तियों से खराब से खराब बीमारी को जख्मों को ठीक कर देते हो ख़राब से ख़राब बीमारी के जख्मों को ठीक कर देते हो राक्षस लोग और परीलोक का युद्ध चल रहा है मैं राक्षस लोग का सेनापति मु्स्सारत हूं और परियों के बालों से घायल हो गया हूं मुझे वापस युद्ध में जाना है मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं कि तुम तुरंत मुझे ठीक करो वरना मैं तुम्हें मार दूंगा और भी परेशान हो गया क्योंकि नदी की जादुई जल के बारे में परियों ने ही उसे बताया था.


परियों की कहानी Pariyon Ki Hindi Kahani


और परियों की ही दुश्मन को वे उस जल से कैसे ठीक कर सकता था मौत के भय से जादूगर ने राक्षस के ऊपर नदी द्वारा लाया हुआ पानी डाल दिया और राक्षस पूरी तरह से ठीक होकर और ज्यादा शक्तिमान होकर परियों से युद्ध करने के लिए चला गया और इसके बाद जादूगर को आराम करने का बिल्कुल भी मौका नहीं मिला हर 15 मिनट के बाद कोई ना कोई राक्षस उसके पास आ जाता और वापस एक होकर चला जाता दूसरी तरफ परियों की सेना में कोहराम मच गया था क्योंकि प्रिया जी तोड़ मेहनत करके युद्ध लड़ रही थी पर वह भी राक्षस को मारा घायल करती वह फिर से ठीक होकर वापस युद्ध करने लगता धीरे-धीरे यह खबर परी लोक की महारानी स्वर्णा परी को भी पहुंच गई और वह सोचने लगी कि आखिर उनका ऐसा कौन सा दुश्मन हो सकता है जो राक्षसों को इस तरह से ठीक करके वापस युद्ध में भेज रहा है और उन्होंने अपनी जादुई शक्तियों से पता लगाया कि यह सारा काम वही जादूगर कर रहा है जिसे उन्होंने जादुई पानी के बारे में बताया था स्वर्णा बड़ी दुखी हुई.


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जिसे उन्होंने जादुई पानी के बारे में बताया था स्वर्णा पड़ी-पड़ी ही दुखी हुई और तुरंत ही अपनी जादुई शक्तियों से जादूगर के घर उपस्थित हो गई और जादूगर से बोली जादूगर मैंने तुम पर विश्वास करके नदी के जादुई पानी के बारे में तुम्हें बताया और तुम उस पानी को मेरे देश के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हो क्या तुम्हें ऐसा करने में जरा भी लज्जा या भय नहीं जादूगर बोला परी मां मैं खुद भी बड़ा परेशान हूं राक्षसों को यह पता चलते ही कि मैं किसी भी तरह के रोगी का इलाज कर सकता हूं लगातार मेरे पास आ रहे हैं और मुझे मौत की धमकी देकर मुझसे इलाज करवा रहे हैं मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है कि मैं किस तरीके से अपने आप को बचा लो मैं उनकी मदद बिल्कुल भी नहीं करना चाहता आप ही दया करके मुझे कोई उपाय बताएं ना बोली तुम्हें बताने के लिए मेरे पास अब कोई उपाय नहीं है किंतु तुमने मेरे बताए हुए उपाय से राक्षसों को जीवन देकर मुझसे दुश्मनी मोल ले ली है राक्षस तो अभी तुम्हारे पास आएंगे किंतु आप पानी तुम्हारी कोई मदद नहीं कर पाएगा क्योंकि मैं उस पानी से अपनी जादुई शक्ति को हमेशा के लिए बाहर निकाल लूंगी और जब तुम राक्षसों को जीवन नहीं दे पाओगे तो राक्षस क्रोधित होकर तुम्हें मार देंगे और यही तुम्हारी सजा है जादूगर घबराकर दया की भीख मांगने लगा और मैंने किसी वरदान के बिना किसी कारण के आपकी सहायता की थी और राक्षसों के आने पर भी मैंने बिना किसी स्वार्थ के उनकी भी सहायता की आप मुझे इस तरह बेसहारा नहीं छोड़ सकती आप मुझ पर दया करें और मुझे इस समस्या का सही हल बताएं ताकि मैं अपनी जान बचा सकूं.

जादूगर पर दया आ गई और उन्हें लगा कि जादूगर सही कह रहा है उन्होंने कहा ठीक है अब राक्षसों का कोई इलाज ना करो जो राक्षस तुम्हारे पास आता है उसको नदी में नहाने के लिए स्वयं नदी में जाएगा और वहां पर उपस्थित परियां उसका काम तमाम कर देंगे और तुम्हारी जान भी बन जाएगी ऐसा कहकर महारानी स्वर्ण वापस चली गई और युद्ध के मैदान में राक्षसों के मुकाबले में फिर से युद्ध करने लगी इधर उद्दीन राक्षस थोड़ा भी प्रयत्न करें बिना अगर एक छोटा सा गांव भी लगता या थोड़ा सा भी विथ जाते तो सोचते कि धरती में रहने वाले जादूगर के पास जाना चाहिए. 

और उससे शक्ति लेकर वापस युद्ध में आ जाना चाहिए और ऐसा सोचकर
ऐसे ही जादूगर के पास आ जाते पर अब जादूगर ने उन्हें नदी में नहाने की सलाह देनी शुरू कर दी जिसमें नहाते ही परियां उनका काम तमाम कर देती और इस प्रकार जादूगर की सहायता करने के कारण धीरे-धीरे राक्षसों की पूरी सेना का सफाया हो गया और जादूगर ने परीलोक की रक्षा करने में परियों का पूरा साथ दिया जिस कारण परियां जादूगर से बहुत प्रसन्न हुई और परियों ने नदी के पानी को फिर से उसकी जादुई शक्तियों से भर दिया और जादूगर जीवन पर्यंत अपने गांव वालों की बीमारियों को दूर करता रहा.