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24 दिसंबर 2019

Pariyon Ki Kahani - Best Hindi Story

Pariyon Ki Kahani -  Best Hindi Story


Pariyon Ki Kahani
Pariyon Ki Kahani

App pad rhe Hai Pariyon Ki Kahani hindi mai:

बहुत पुरानी बात है, एक गांव में एक बूढ़ा जादूगर रहा करता था नेट तेल और दयालु था और अपनी तरफ से सबकी मदद करने की कोशिश किया करता था ऐसा कोई भी घर नहीं था जिसकी मदद जादूगरनी ना की हो अब जादूगर की शक्ति बुढ़ापे के कारण काफी कम हो गई थी अपना अधिकांश समय गांव के किनारे बने जंगल में बैठकर बिताया करता था जंगल के किनारे बैठे बैठे जादूगर को कई प्रकार के तरह तरह के ख्याल आते रहते थे और वह अपने पुराने दिनों की यादो मैं खोया रहता था.

एक बार पूर्णिमा की रात को जब वह जंगल में नदी के किनारे बैठकर ख्यालों में खोया हुआ था तभी उसे दूर लगे एक बड़े पीपल के पेड़ के ऊपर बहुत से जुगनू दिखाई दिए जादूगर सोचने लगा अक्सर जुगनू पूरी तरह फैले रहते हैं आखिर ऐसी क्या बात है कि सभी जुगनू ढूंढ के रूप में ऑप्शन झुंड के रूप में एक ही पेड़ पर एक ही जगह उपस्थित है अपने मन की जिज्ञासा को दूर करने के लिए जादूगर पीपल के पेड़ की तरफ चल पड़ा वहां पहुंचते ही उसने देखा कि बहुत से हंस पेड़ों की टहनियों में फंसे हुए हैं और उनके पंख पत्तियों और टहनियों से बुरी तरह से उलझ रहे हैं जिसके कारण वे अपने आपको पेड़ पत्तियों से छुड़ाने में नाकामयाब हो गए हैं और जुगनू अपनी रोशनी से उनकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं.


परियों की कहानी


जादूगर बड़ा हैरान हुआ अभी मैं सोच ही रहा था कि अचानक एक सुनहरे रंग का हंस बोला है जादूगर तुम रोज यहां आते हो और अपना समय यहां पर जाते हो हम सभी रोज ही तुम्हें देखते हैं हमें पता है कि तुम बहुत ही दयालु जादूगर हो क्या तुम अपने जादू से हमको इस पेड़ की पत्तियों और टहनियों से मुक्त कर सकते हो जादूगर बोला प्यारे हंसों यह सच है कि मैं जादूगर हूं किंतु अब मैं बहुत बुरा हो चुका हूं और मेरी जादुई शक्तियां इतना काम नहीं कर पाती फिर भी क्योंकि आपने मुझसे दद की भीख मांगी है इसलिए मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगा कि आपको इन पत्तियों और टहनियों से छुड़ा पाऊं. और इसके बाद जादूगरनी पेड़ के नीचे बैठकर अपनी तमाम जादुई शक्तियों को मंत्रों के जरिए बुलाना शुरू किया जादूगर के अंदर जीवन शक्ति काफी कम हो चुकी थी.

इसलिए उसकी कड़ी मेहनत के बाद उसकी जादुई शक्तियां फिर से जागृत हुई और जादूगर ने उन शक्तियों की मदद से हंसों को पेड़ की पत्तियों और टहनियों से आजाद करवाने में उनकी मदद की और उन्हें आजाद करा दिया जादूगर की सहायता से सभी हंस पड़े ही खुश हुए और उन्होंने जादूगर से कोई वरदान मांगने को कहा जादूगर जोर से हंसने लगा और ते हुए बोला प्यारे हो तुम भला अपने जीवन की रक्षा खुद ही नहीं कर पाते ऐसी अवस्था में तुम मुझे कैसे कोई वरदान दे सकते हो तुम इतने परेशान ना हो मुझे कुछ भी देने की जरूरत नहीं है.

तुम आराम से अपने घर जाओ और अपना जीवन बिताओ हंस उसकी बात सुनकर तुरंत अपने असली रूप में आ गए परी लोक की महारानी स्वर्णा परी अपनी सभी राशियों के साथ जंगल में घूमने के लिए आई थी और पीपल के पेड़ पर उड़ते हुए जुगनू को देखकर सभी पीपल के पेड़ के ऊपर ही उतर गई थी जिसके कारण उनके पंख बुरी तरह से पीपल के पेड़ में फंस गए थे.

और क्योंकि पीपल का पेड़ ही उन जुगनू का एकमात्र बसेरा था इसलिए जुगनू के घर को उनके घर को बर्बाद नहीं करना चाहती थी इसलिए पीपल के पेड़ पर उन्होंने कोई जादू नहीं करा था और खुद को बचाने के लिए जादूगर से मदद मांगी थी जादूगर यह देखकर बड़ा प्रसन्न हो गया और उसने परियों से कहा प्यारी परियों अगर मुझे कुछ देना ही चाहती हो तो कुछ ऐसा विशेष दो कि मैं गांव की सेवा कर सकूं परियों ने कहा सामने यह जो नदी बह रही है रात को उसका जल जाती हो जाता है.


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यह बात हम परियों के सिवा किसी को भी नहीं पता और इसके जल से हम बड़ी से बड़ी बीमारी को  ठीक कर सकते हैं अगर तुम चाहो तो इस जल का उपयोग करके अपने गांव वालों की सेवा कर सकते हो और यदि इसके अलावा भी कभी तुम्हें हमारी कोई आवश्यकता पड़े तो तुम नदी के जल के पास आकर स्वर्णा परी का नाम बुलाना हम जरूर तुम्हारी पुकार सुनकर तुम्हारे सामने आ जाएंगे और परियों अंतर्ध्यान हो गए जादूगर बड़ा प्रसन्न हुआ और उसने सोचा चलो कम से कम बुढ़ापे में वह यह तो अच्छा काम कर पाएगा ऑप्शन कम-से-कम बुढ़ापे में तो वह कुछ अच्छा काम कर पाएगा और फिर नए उत्साह से अपने गांव वापस चला गया उसने देखा कि गांव के सरपंच के घर सभी लोग जोर जोर से रो रहे थे पूछने पर पता चला कि सरपंच की माता जी ओझा की बीमारी से पीड़ित हो गई है.

और उनके बचने की कोई भी उम्मीद नहीं है जादूगर तुरंत ही नदी की ओर बढ़ चला और वहां से नदी का पानी लेकर आ गया और उसने बिना किसी से कुछ कहे सरपंच की माता जी के ऊपर नदी का एक बाल्टी पानी डाल दिया सभी गांव वालों को जादूगर की इस हरकत पर बड़ा ही क्रोध आया और वह जादूगर को बुरा भला कहने लगे किंतु तभी चमत्कार हुआ और सरपंच की माताजी उठ कर बैठ गई उनको देखने से ऐसा लगता ही नहीं था कि वह पिछले 15 दिनों से बीमार थी उनके शरीर की पूरी शक्ति वापस आ गई थी और वह बहुत ही स्वस्थ लग रही थी यह देखकर जादूगर की जय जयकार करने लगे और उन्हें लगने लगा कि जादूगर की जादुई शक्तियां वापस आ गई है और जादूगर अब सब को ठीक कर सकता है इस घटना के बाद जादूगर अपने घर चला गया.

और सो गया इस घटना को 10 - 15 दिन बीत चुके थे जादूगर अपनी झोपड़ी में आराम कर रहा था कि अचानक उसकी झोपड़ी का दरवाजा खुला और एक खूंखार राक्षस घायल अवस्था में उसके सामने आकर बैठ गया और बोला मुझे पता चला है कि तुम अपनी जादुई शक्तियों से खराब से खराब बीमारी को जख्मों को ठीक कर देते हो ख़राब से ख़राब बीमारी के जख्मों को ठीक कर देते हो राक्षस लोग और परीलोक का युद्ध चल रहा है मैं राक्षस लोग का सेनापति मु्स्सारत हूं और परियों के बालों से घायल हो गया हूं मुझे वापस युद्ध में जाना है मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं कि तुम तुरंत मुझे ठीक करो वरना मैं तुम्हें मार दूंगा और भी परेशान हो गया क्योंकि नदी की जादुई जल के बारे में परियों ने ही उसे बताया था.


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और परियों की ही दुश्मन को वे उस जल से कैसे ठीक कर सकता था मौत के भय से जादूगर ने राक्षस के ऊपर नदी द्वारा लाया हुआ पानी डाल दिया और राक्षस पूरी तरह से ठीक होकर और ज्यादा शक्तिमान होकर परियों से युद्ध करने के लिए चला गया और इसके बाद जादूगर को आराम करने का बिल्कुल भी मौका नहीं मिला हर 15 मिनट के बाद कोई ना कोई राक्षस उसके पास आ जाता और वापस एक होकर चला जाता दूसरी तरफ परियों की सेना में कोहराम मच गया था क्योंकि प्रिया जी तोड़ मेहनत करके युद्ध लड़ रही थी पर वह भी राक्षस को मारा घायल करती वह फिर से ठीक होकर वापस युद्ध करने लगता धीरे-धीरे यह खबर परी लोक की महारानी स्वर्णा परी को भी पहुंच गई और वह सोचने लगी कि आखिर उनका ऐसा कौन सा दुश्मन हो सकता है जो राक्षसों को इस तरह से ठीक करके वापस युद्ध में भेज रहा है और उन्होंने अपनी जादुई शक्तियों से पता लगाया कि यह सारा काम वही जादूगर कर रहा है जिसे उन्होंने जादुई पानी के बारे में बताया था स्वर्णा बड़ी दुखी हुई.


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जिसे उन्होंने जादुई पानी के बारे में बताया था स्वर्णा पड़ी-पड़ी ही दुखी हुई और तुरंत ही अपनी जादुई शक्तियों से जादूगर के घर उपस्थित हो गई और जादूगर से बोली जादूगर मैंने तुम पर विश्वास करके नदी के जादुई पानी के बारे में तुम्हें बताया और तुम उस पानी को मेरे देश के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हो क्या तुम्हें ऐसा करने में जरा भी लज्जा या भय नहीं जादूगर बोला परी मां मैं खुद भी बड़ा परेशान हूं राक्षसों को यह पता चलते ही कि मैं किसी भी तरह के रोगी का इलाज कर सकता हूं लगातार मेरे पास आ रहे हैं और मुझे मौत की धमकी देकर मुझसे इलाज करवा रहे हैं मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है कि मैं किस तरीके से अपने आप को बचा लो मैं उनकी मदद बिल्कुल भी नहीं करना चाहता आप ही दया करके मुझे कोई उपाय बताएं ना बोली तुम्हें बताने के लिए मेरे पास अब कोई उपाय नहीं है किंतु तुमने मेरे बताए हुए उपाय से राक्षसों को जीवन देकर मुझसे दुश्मनी मोल ले ली है राक्षस तो अभी तुम्हारे पास आएंगे किंतु आप पानी तुम्हारी कोई मदद नहीं कर पाएगा क्योंकि मैं उस पानी से अपनी जादुई शक्ति को हमेशा के लिए बाहर निकाल लूंगी और जब तुम राक्षसों को जीवन नहीं दे पाओगे तो राक्षस क्रोधित होकर तुम्हें मार देंगे और यही तुम्हारी सजा है जादूगर घबराकर दया की भीख मांगने लगा और मैंने किसी वरदान के बिना किसी कारण के आपकी सहायता की थी और राक्षसों के आने पर भी मैंने बिना किसी स्वार्थ के उनकी भी सहायता की आप मुझे इस तरह बेसहारा नहीं छोड़ सकती आप मुझ पर दया करें और मुझे इस समस्या का सही हल बताएं ताकि मैं अपनी जान बचा सकूं.

जादूगर पर दया आ गई और उन्हें लगा कि जादूगर सही कह रहा है उन्होंने कहा ठीक है अब राक्षसों का कोई इलाज ना करो जो राक्षस तुम्हारे पास आता है उसको नदी में नहाने के लिए स्वयं नदी में जाएगा और वहां पर उपस्थित परियां उसका काम तमाम कर देंगे और तुम्हारी जान भी बन जाएगी ऐसा कहकर महारानी स्वर्ण वापस चली गई और युद्ध के मैदान में राक्षसों के मुकाबले में फिर से युद्ध करने लगी इधर उद्दीन राक्षस थोड़ा भी प्रयत्न करें बिना अगर एक छोटा सा गांव भी लगता या थोड़ा सा भी विथ जाते तो सोचते कि धरती में रहने वाले जादूगर के पास जाना चाहिए. 

और उससे शक्ति लेकर वापस युद्ध में आ जाना चाहिए और ऐसा सोचकर
ऐसे ही जादूगर के पास आ जाते पर अब जादूगर ने उन्हें नदी में नहाने की सलाह देनी शुरू कर दी जिसमें नहाते ही परियां उनका काम तमाम कर देती और इस प्रकार जादूगर की सहायता करने के कारण धीरे-धीरे राक्षसों की पूरी सेना का सफाया हो गया और जादूगर ने परीलोक की रक्षा करने में परियों का पूरा साथ दिया जिस कारण परियां जादूगर से बहुत प्रसन्न हुई और परियों ने नदी के पानी को फिर से उसकी जादुई शक्तियों से भर दिया और जादूगर जीवन पर्यंत अपने गांव वालों की बीमारियों को दूर करता रहा.

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